पंजाब पर आक्रमण करने के बाद डलहौजी ने ब्रिटिश साम्राज्य को भारत में और ज्यादा फैलाना चाहा। उसने अपने एक संदेश में गर्व भरे शब्दों में लिखा कि अब ब्रिटिश साम्राज्य को फ़ैलाने के लिए भारत के अन्य इलाको पर हमले कि तैयारी की जाए व इसको चारो दिशाओं से घेर लिया जाए। लेकिन यहां पर वह शांति के माध्यम से अपना राज्य विस्तार करना चाहता था। इसके लिये उसने बर्मा को शान्ति का संदेश भेजा। लेकिन वह अपने उद्धेश्य में सफ़ल नहीं हुआ कुछ ही समय में यह शान्ति भंग हो गई और यह शान्ति क्रान्ति में बदल गई। धीरे-धीरे बर्मा पर ब्रितानियों ने अपना अधिकार जमा लिया। शीघ्र ही यह क्रान्ति हिमालय से लेकर रामेश्वरम तथा सिन्ध से इरावदी तक फ़ैल गई। इस तरह शान्ति से डलहौजी ने बर्मा में अपना साम्राज्य विस्तार किया।
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